Saturday, July 7, 2007

विट्ठल प्रसाद कि सत्य कथा

विट्ठल ने एक ब्राह्मण के परिवार में जन्म लिया था। उसने बचपन से ही एक दर्दनाक जीवन बिताया था। इसके दो कारण थे। एक कि उसके पिता बहुत ही क्रोधी स्वभाव के व्यक्ति थे। उनका गुस्सा सदा भूखे पेट होने पर अधिक दिखाई देता था। यह गुस्सा विट्ठल पर इसलिए भी उतारा जाता था कि वह सदा एक भयानक पेट दर्द से पीड़ित रहता था। इस विषय में उसके परिवार के लोग बात भी नहीं करना चाहते थे क्योंकि वह सोचते थे कि विट्ठल को कोई दर्द नहीं है वह केवल काम न करने का बहाना बनाता है। यही कारण था कि विट्ठल का जीवन बहुत ही दर्दनाक था।

पर सत्य बात यह थी कि विट्ठल वास्तव में एक भयानक पीड़ा से पीड़ित रहता था। उसके बार-बार की शिकायत से परेशान होकर उसकी माँ ने बच्चों समेत आत्महत्या करने का निर्णय ले लिया, पर उसके पिता उन्हें इस इरादे से फेर लाए। पर दुख की बात यह हुई कि इस इरादे को उसके पिता अपने लिए बदल न सके और उन्होंने स्वयं आत्महत्या कर ली। इस से परिवार की हालत और भी बत्तर हो गई।

विट्ठल के जीवन में एक समस्या और जुड़ गई और वह थी उसकी बिमारी की जाँच रिपोर्ट। रिपोर्ट से पता चला कि विट्ठल के पेट में एक बड़ी गाँठ(ट्यूमर) थी जिसका तुरन्त ऑपरेशन करना आवश्यक था। सो तुरन्त ही उसका ऑपरेशन किया गया। पर दुख की बात यह थी कि ऑपरेशन के बाद भी उसका दर्द कम न हुआ। विट्ठल और उसके परिवार के दुखों को देख कर यीशु मसीह ने उसके परिवार मे प्रवेश किया।

कुछ समय पहले ही यीशु ने एक और ब्राह्मण परिवार को छुआ था। तब विट्ठल उस परिवार से बहुत नाराज़ था कि उसका मित्र मसीही धर्म में चला गया था। पर अब यीशु के असीम प्यार के विषय में जान कर उसने एक प्रार्थना सभा में जाने का निर्णय किया। उस प्रार्थना सभा में विट्ठल के जीवन में एक चमत्कार हो गया। वहीं पर उसे प्रार्थना के दौरान यीशु ने उसे न केवल पेट दर्द से वरण उस दर्द से भी जो दुखों का कारण उसके दिल मे रहता था मुक्त कर दिया। धन्यवाद हो यीशु मसीह का कि वह अब अपने वायदे के अनुसार न तो विट्ठल को छोड़ेगा और न त्यागेगा। वह सदा उसके साथ रहेगा।

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